सांख्यदर्शनम्
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वस्तुतः कापिल सांख्य में जड़ प्रकृति को जगत् का मूल उपादास स्वीकार करने के कारण ईश्वर को जगत् का केवल अधिष्ठाता व नियन्ता माना गया है, इसी कारण प्रकृति से अतिरिक्त ईश्वर तथा अन्य किसी तत्त्व को जगत् के उपादान होने को निषेध किया गया है। ईश्वरसिद्धेः सूत्र में भी जगत् उपादान भूत ईश्वर को असिद्ध बताया है। सवेजगन्नियन्ता ईश्वर का यहाँ निषेध नहीं है। पूर्वापर प्रसंग के अनुसार यह अर्थ सूत्र के प्रकरण और उसकी टिप्पणी में विस्तार के साथ प्रकट कर दिया हैं सांख्य के अन्य प्रसंगो में भी ईश्वर के जगन्नियन्ता व अधिष्ठाता होने तथा प्रकृति के जगदुपादान होने का विस्तृत वर्णन है।
इससे स्पष्ट है कि वास्तविक सिद्धान्त अकाल में ही किस प्रकार भ्रन्ति-घटाओं से आच्छादित होते रहे है। प्रस्तुत भाष्य में उनके विच्छिन्न कर वास्तविकताओं को स्पष्ट करने का प्रस्ताव किया गया है।
Additional information
| Weight | 590 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 14 × 3 cm |
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