संक्षिप्त व संपूर्ण सरल चरक संहिता
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सृष्टि के आरम्भ से ही मनुष्य अपनी आयु तथा अपने स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहा है। समय-समय पर विशिष्ट व्यक्तियों को जिन वस्तुओं से कोई अनुभव हुआ, उन सिद्धान्तों के संकलन से ऐसे ग्रन्थों का निर्माण हुआ, जो मानव के स्वास्थ्य के लिए कल्याणकारी सिद्ध हुए। आयुर्वेद भी ऐसा ही एक प्राचीन ग्रन्थ है, जिसमें स्वास्थ्य सम्बन्धी सिद्धान्तों की जानकारियां दी गयी हैं। यह अथर्ववेद का उपवेद है। यह विज्ञान, कला और दर्शन का मिश्रण है। आयुर्वेद नाम का अर्थ है-‘ जीवन का ज्ञान’। दूसरे शब्दों में-जिस ग्रन्थ में हित आयु (जीवन के अनुकूल), अहित आयु (जीवन के प्रतिकूल), सुख आयु (स्वस्थ जीवन) और दुःख आयु (रोग अवस्था) – इनका वर्णन हो, उसे आयुर्वेद कहते हैं। आयुर्वेद के दो प्रमुख उद्देश्य हैं-1. स्वस्थ व्यक्तियों के स्वास्थ्य की रक्षा करना तथा 2. रोगी व्यक्तियों के विकारों को दूर कर उन्हें स्वस्थ बनाना। भारतीय चिकित्सा विज्ञान के तीन बड़े नाम हैं- चरक, सुश्रुत और वाग्भट। चरक संहिता, सुश्रुत संहिता तथा वाग्भट का अष्टांगसंग्रह आज भी भारतीय चिकित्सा विज्ञान (आयुर्वेद) के मानक ग्रन्थ हैं। प्राचीनकाल में जब चिकित्सा विज्ञान की इतनी प्रगति नहीं हुई थी, कुछ एक चिकित्सक ही हुआ करते थे, उस समय चिकित्सक स्वयं ही ओषधि बनाते थे, ऑपरेशन करते थे और रोगों का परीक्षण भी करते थे। उस समय में आज जैसी प्रयोगशालाएं, परीक्षण यन्त्र एवं चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं, फिर भी प्राचीन चिकित्सकों का चिकित्सा ज्ञान व चिकित्सा स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी थी। दो हज़ार वर्ष पूर्व भारत में ऐसे ही स्वनामधन्य चिकित्सक चरक हुए हैं, जिन्होंने आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में शरीर विज्ञान, निदान शास्त्र और भ्रूण विज्ञान पर ‘चरक संहिता’ नामक ग्रन्थ की रचना की। इस ग्रन्थ को आज भी चिकित्सा जगत् में बहुत सम्मान दिया जाता है। चरक वैशम्पायन के शिष्य थे। उनके चरक संहिता ग्रन्थ में भारत के पश्चिमोत्तर प्रदेश का ही अधिक वर्णन मिलता है
Additional information
| Weight | 1550 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 14 × 7 cm |
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