रसोई में दवाई
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“रसोई में दवाई” एक अत्यंत उपयोगी और व्यवहारिक पुस्तक है, जिसमें यह बताया गया है कि हमारे घर की रसोई में उपलब्ध सामान्य खाद्य पदार्थ केवल भोजन ही नहीं, बल्कि अनेक साधारण रोगों की औषधि भी हैं।
प्राचीन भारतीय परंपरा और घरेलू अनुभव के आधार पर लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि अनाज, दालें, सब्जियाँ, मसाले, फल तथा अन्य रसोई में उपलब्ध सामग्री का सही उपयोग करके अनेक सामान्य रोगों से बचाव और उपचार किया जा सकता है।
यह पुस्तक इस विचार को सामने रखती है कि स्वस्थ जीवन के लिए महंगी दवाओं पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं होती। यदि हम अपने भोजन और रसोई की सामग्री का ज्ञानपूर्वक उपयोग करें तो वही हमारे शरीर के लिए औषधि का कार्य कर सकती है।
पुस्तक में रसोई में मिलने वाली विभिन्न वस्तुओं के गुण, उनके उपयोग और उनसे बनने वाले सरल घरेलू उपचारों का वर्णन किया गया है। यह पुस्तक हर गृहस्थ, परिवार और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक व्यक्ति के लिए अत्यंत उपयोगी मार्गदर्शिका है।
Description
बीमारी से छुटने के लिए दवा ली जाती हैं। भूख मनुष्य को दिन में 2–4 बार लगती हैं। भूख लगते ही पाँव रसोई की ओर चल पड़ते हैं। माँ, काकी, दीदी, भाभी जो भी कोई हो उसके सामने रोटी के लिए बावेला मचाया जाता हैं। भूखे को भोजन मिलता हैं रसोई से। भूख को बीमारी मानें तो इसका इलाज हैं भोजन की प्राप्ति। पर रसोई में रखी चीजों से साधारण बीमारियों के लिए दवा भी बनाई जा सकती हैं।
रसोई में बाजरा, जौ, गेहूँ जैसे धानों का आटा मौजूद रहता हैं। साबुत चावल भी होते हैं। उड़द, मोठ, मसूर, चना, तुअर, मूंग आदि की दालें भी होती हैं। रोटी आदि को चुपड़ने व दालों को छौंकने के लिए गाय का घी भी होता हैं। गाय की छाछ, दही, दूध भी रसोई में मिलते हैं।
चणों की पाँसी, मेथी, बथुआ, पालक, पतागोभी जैसी सब्जियाँ पत्ती के रूप में होती हैं। फूल रूप में फूलगोभी भी मिल जाता हैं। कभी-कभी गुलाब आदि के फूल भी मिल जाते हैं।
हरा टमाटर, आल (यानी लौकी), तोर (तुरई), टिण्डे, मिण्डी जैसी फल रूपी सब्जियाँ भी रसोई में होती हैं। शकरकन्द, आलू, प्याज, लहसुन जैसी कन्द रूपी सब्जियाँ भी वहीं दिखाई देंगी।
केला, अमरूद, लाल टमाटर, नाशपाती, नाग, सेव जैसे फल भी रसोई में मिलेंगे। नींबू, अनार, आम, संतरा, अंगूर आदि ये अधिक रस वाले फल भी वहीं पर रहते हैं।
मिठाई के नाम से लार किस मुँह में नहीं टपकने लगती हैं। गुड़, खाण्ड, मिश्री आदि चाहिए मिठास यदि बनने हैं तो रोटी, भात, दाल, सब्जी तैयार करने में ही माँ या और किसी को कितनी मेहनत करनी पड़ती हैं। फिर मिठाई बनाने की बात हैं तो मेहनत का क्या अंदाज लगाया जाये।
भोजन बनाने की मेहनत सफल तब ही मानी जाती हैं जबकि हर चीज स्वाद वाली बनी हो। कहीं भूल से आटे में नमक नहीं डले या ज्यादा पड़ने से रोटी खारी सी हो जाये। फिर तेवर देखो देवर के। बेचारी भाभी तो सकपका जायेगी ही। परन्तु माँ भी हो तो बेटा उसे आड़े हाथों ले लेगा।
Additional information
| Weight | 140 g |
|---|---|
| Dimensions | 22 × 14 × 2 cm |
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