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सुखी गृहस्थ
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Description
आज की दुनिया में सबसे बड़ा आश्रम गृहस्थ ही है और ऐसी अवस्था में पहुँच गया है कि गुरु जी का वचन-
“नानक दुखिया सब संसार”
ठीक घटता है। यह विचार आया कि इस समय एक नई पुस्तिका तैयार करनी चाहिए जो गृहस्थी मानव को उलशनों में शान्ति का आभास करा सके, जो नई सन्तान के हृदय को भी छू सके और उसका ठीक पथ-प्रदर्शन कर सके। मैंने इस लघु-पुस्तिका में जो कुछ लिखा है, यह अपने अनुभव को वेद तथा शास्त्राज्ञा के साथ मिला कर लिखा है।
उद्देश्य यह है कि किसी प्रकार गृहस्थ आश्रम सुख, आराम तथा शान्ति का केन्द्र बन सके।
Additional information
| Weight | 133 g |
|---|---|
| Dimensions | 18 × 12 × 1 cm |
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